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Top 3 moral stories in hindi 2020 for class 7,8,9 with pictures

Moral stories in hindi 2020 : hello guys aj hum aapko bohat hii kamal ke full hindi moral stories aapke liye le kar ae hai. agar aap hindi morals read krna me interested hoo to please iss article ko pura read krna aapko bohat mjaa aeyga.

Top 3 moral stories in hindi 2020
Top 3 moral stories in hindi 2020 

Magic pencil : (मैजिक पेंसिल)

Moral story pencil

मैजिक पेंसिल, कुशाल नाम का एक लड़का एक गाँव में रहता था। उन्हें ड्राइंग करना बहुत पसंद था। वह लड़का गीली मिट्टी और रेत पर नुकीले पत्थरों और छोटी लकड़ियों का काइस्तेमाल ड्रॉ करने के लिए करता था। उसके पास पेंसिल या कागज खरीदने के पैसे नहीं थे।

वह हमेशा यह कामना करता था कि उसके पास एक पेंसिल हो, जिसके साथ वह सुंदर चित्र बना सके। वह हमेशा भावुक करने वाले चित्र बनाता। एक दिन जब वह drawing कर रहा था तो वह एक बूढ़ा व्यक्ति उससे मिला।

उन्होंने कुशाल को एक पेंसिल दी और कहा ... आपको इसके साथ केवल गरीब लोगों को तस्वीरें बनाकर देनी है । और अगर आपको कभी भी मुझे बुलाना हो तो इस पेंसिल की मदद से तुम मुझे बुला सकते हो। यह कहने के बाद बूढ़ा गायब हो गया। कुशाल बहुत खुश था।

उसने एक आम को पेंसिल से बनाया। आम असली आम में बदल गया। उसके बाद उसने एक कुत्ते की तस्वीर बनाया। वह भी एक वास्तविक कुत्ते में तब्दील हो गया।

कुशल बोला : यह क्या है? यह तो एक जादुई पेंसिल है। बहुत बहुत धन्यवाद, पुराने चाचा। मैं हमेशा आपके शब्दों को याद रखूंगा। कुशाल ने अपनी पेंसिल से खाना बनाया । वह भी वास्तविक भोजन में तब्दील हो गया। उस लड़के ने फिर अपने माता-पिता को अनाज, फल, कपड़े दिए। वे सभी वास्तविक चीजों में बदल गए।

कुशाल ने फिर उस - उस चीज़ की तस्वीरें बनाई, जिसकी ज़रूरत गरीब लोगों को थी ... और उन्हें दे वो चीजे दे देता। गाव के गरीब लोग कुशाल से बहुत खुश थ कयोंकि वह सबकी मदद करता था। और फिर गाव के राजा ने एक दिन उसके बारे में सुना। उसने कुशाल को बुलाया और आदेश दिया ... कि हमारे शाही बगीचे के लिए एक सोने का पेड़ बनाओ। और मुझे अपनी पेंसिल दो। तो कुशल बोला राजा जी, आप बहुत अमीर हैं।

मैं केवल गरीब लोगों के लिए तस्वीरें बनाता हूं। राजा को गुस्सा आ गया। उसने आदेश दिया कि उससे पेंसिल छीन ली जाए। और राजा ने वो पेंसिल अपने पास रख ली, और उसने खुद सोने का पेड़ बनाना शुरू किया। लेकिन सोने का पेड़ दिखाई नहीं दिया।

राजा ने फिर मुख्यमंत्री को चित्र बनाने के लिए कहा। लेकिन यहां तक ​​कि उसकी ड्राइंग भी वास्तविक में नहीं बदल पाई। राजा बहुत क्रोधित था। और फिर राजा बोला कुशाल, मेरी बात सुनो। तुपको वह चित्र बनाना होगा जो मैं चाहता हूं कि तुम बनाओ या नही तो मैं तुपको कैद कर लूंगा.

कुशाल को लगा कि वह अगर राजा की बात नही माना तो.. ... वह उसे सलाखों के पीछे डाल देगा ... ... और वह फिर गरीबों की मदद करने में सक्षम नहीं होगा। वह बहुत होशियार था। उसने पेंसिल उठाई और उसी बूढ़े की तस्वीर बना दी जिसने पेंसिल दी थी। बूढ़ा उसके सामने उपस्थित हुआ। उस बूढ़े ने राजा के साथ बात करने की कोशिश की।

बूढ़ा बोला : नमस्कार, राजा जी। आपके पास धन की कमी नहीं है। लेकिन कुशाल गरीब लोगों को खुश करने की कोशिश कर रहा हैं। आपने उससे पेंसिल छीन ली, लेकिन यह पेंसिल आपकी इच्छा पूरी नहीं कर पाई। कोई और इंसान भी इस पेंसिल से जादुई तसवीरे नही बना सकता है।

कुशाल के काम के प्रति लगन और उसकी ईमानदारी को देखने के बाद ... मैंने उसे पेंसिल दी। राजा को यह बात सुनते अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने बूढ़े आदमी और कुशाल से क्षमा मांगी। और फिर बूढ़ा गायब हो गया। राजा ने फिर कुशाल को पुरस्कृत किया।

हमे इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपना काम ईमानदारी से और लगन के साथ करना चाहिए। हमारी स्वार्थी इच्छा को पूरा करने के लिए लोगों को धोखा देना गलत है।


Moral stories in Hindi with pictures 

cindrella

Moral story Cinderella

एक बार की बात है, एक बहुत धनी व्यक्ति रहता था। उनकी एक प्यारी और दयालु बेटी थी। चूंकि उस आदमी की पत्नी की मृत्यु हो गई थी, उसने फिर से शादी की, उम्मीद है कि उसकी नई पत्नी उसकी बेटी के लिए एक अच्छी माँ होगी। लेकिन पुरुष की नई पत्नी एक मतलबी और स्वार्थी महिला निकली।

और उसकी दो बेटियाँ थीं जो उसकी तरह ही थीं। वे सभी इतने बतमिज थे और कि वह आदमी बहुत दुखी हो गया था और दूर काम करने चला गया था। और इसलिए उस आदमी ने अपनी बेटी को उसकी सौतेली माँ और सौतेली बहनों के पास छोड़ दिया। गरीब लड़की अपनी सौतेली माँ और सौतेली बहनों से प्यार से रह रही थी।

लेकिन वे सभी मतलबी थे और उस मासूम लड़की को एक नौकरानी में बदल दिया। उन्होंने उपना नाम सिंड्रेला के नाम पर बदल दिया, क्योंकि उसका चेहरा चिमनी की सफाई करने के कारण से धूल-धूसरित हो गया था । फिर सौतेली बहने बोली Haha! तेरा चेहरा हमेशा धुल से भरा हुआ रहता है!

हम अभ से तेरे को सिंड्रेला कहेंगे! सिंडरेला! हा हा हा हा! एक दिन, एक शाही दूत घर पर आया। उसने कहा राजा और रानी ने उन सभी युवतियों को dance के लिए आमंत्रित किया है। उनका बेटा, राजकुमार सभी युवा महिलाओं के साथ नृत्य (dance) करेगा और दुल्हन का चयन करेगा।

निमंत्रण ने सभी को बहुत खुश किया। Cinderella की सौतेली बहन बोली : मैं राजकुमार के साथ नृत्य करने के लिए इंतजार नहीं कर सकती ! मुझे आशा है कि वह मुझे अपनी दुल्हन के रूप में चुनेगे ! फिर सौतेली माँ बोली : मैं तो बस यही चाहती हु कि मेरी बेटियाँ राज महल में सभी युवा महिलाओं के बीच सबसे अच्छी पोशाक पहने हों।

Dance के दिन, सिंड्रेला की सौतेली माँ ने अपनी दो बेटियों के लिए सबसे अच्छे कपड़े और जूते खरीदे। लेकिन उसने सिंड्रेला के लिए कुछ नहीं खरीदा । फिर  Cinderella बोली माँ, मुझे भी पहनने के लिए कुछ नया चाहिए। मेरे पास इन कपड़ों के अलावा कुछ नहीं है।

सिंड्रेला की माँ बोली : कि ये पुराने कपड़े सिर्फ तुम्हारे लिए सही हैं क्योंकि तुम एक नौकर लड़की हो। और जैसा कि तुम जानती हो कि नौकर लड़कियों को राजकुमारों के साथ नृत्य नहीं करना चाहिए। हा हा हा हा हा! बेचारी सिंड्रेला! वह घर पर बैठी और रोती रही जबकि बाकी सभी लोग राज महल गए हुए थे। अचानक, एक दयालु और सुंदर परी दिखाई दी। और वो बोली हैलो, सिंड्रेला.

सिंड्रेला बोली : हैलो! तुम कौन हो?

परी बोली : मैं तुम्हारी परी माँ हूँ। क्या तुम dance पर जाना चाहेंगी?

सिंड्रेला बोली : हा मै जाना चाहती हूँ, लेकिन मैं नहीं जा सकती। मेरे पास पहनने के लिए अच्छे कपड़े नहीं हैं, न ही कोई यात्रा करने के लिए गाड़ी है.

परी बोली : आप देखिए। जैसे ही मैं अपनी छड़ी लहराऊंगा आपके पास dance पे जाने के लिए आवश्यक सब कुछ होगा! और परी के बोलते ही सिंड्रेला के पुराने कपड़े झिलमिलाते गाउन में बदल गए। उसकी चप्पल नाजुक कांच की चप्पलों में बदल गई।

सिंड्रेला हैरान हो गई, फिर परी सिंड्रेला को बगीचे में ले गई। उसने अपनी छड़ी फिर से लहराई और एक कद्दू को चमचमाती सुनहरी गाड़ी में बदल दिया। परी ने बगीचे में खेलने वाले चूहों को घोड़ों में बदल दिया, एक चूहे को एक घुड़सवार में, और एक छिपकली को स्मार्ट फुटमैन में बदल दिया।

सिंड्रेला बोली : मैं अब राज महल dance के लिए जा सकती हूं। शुक्रिया, परी माँ।

परी बोली : सिंड्रेला! लेकिन जैसे ही आधी रात होगी तब मेरा जादू गायब हो जाएगा। और जो सुंदर पोशाक आपने पहन रखी हैं और घोड़ों समेत सभी चीजें वापस वही रुप मे बदल जाएंगी जो वे पहले थी।

सिंड्रेला बोली : मैं आधी रात तक वापस आ जाऊंगी, अलविदा परी माँ।

और फिर सिंड्रेला राज महल जा पहुची और वहा पर सिंड्रेला इतनी सुंदर लग रही थी कि हर कोई उसे पलत - पलत कर देख रहे थे । और राजकुमार उससे इतना मंत्रमुग्ध था कि वह केवल उसके साथ ही नृत्य करना चाहता था।

राजकुमार बोला : क्या मैं आपके साथ नृत्य करूं?

सिंड्रेला बोली : हाँ जरुर सिंड्रेला

सिंड्रेला को वहा पर किसी ने पहचाना नहीं और उसने राजकुमार के साथ नृत्य करके बहुत खुशी महसूस करी। और राजकुमार ने महसूस किया कि वह सबसे दयालु, सबसे खूबसूरत युवती थी.

सिंड्रेला को देख बाकी की लड़किया बोली, वो कोन हैं? राजकुमार केवल उसके साथ ही नृत्य करना चाहता है। हमने उसे पहले कभी नहीं देखा। वह एक राजकुमारी या जरुर बहुत अमीर लड़की होगी। सिंड्रेला के राजकुमार के साथ नृत्य करने के दौरान समय बहुत ज्यादा हो गया था। और कुछ ही समय में, आधी रात होने वाली थी।

सिंड्रेला बोली : मुझे क्षमा करें, राजकुमार। मेरे निकलने का समय हो गया है। सिंड्रेला जल्दबाजी मे निकल गई और जल्दबाजी के कारण सिंड्रेला का एक जुता वही गिर गया.

राजकुमार बोला : रुको! कृपया मुझे अपना नाम बताएं और आप कहां रहते हैं? और क्या हम फिर मिल सकते हैं।

आधी रात होते ही सिंड्रेला अपने घर पहुंची। और ठीक उसके बाद, जादू गायब हो गया। सिंड्रेला के पैर में केवल कांच का जूता अपरिवर्तित रहा। अगले दिन, शाही दूत राजकुमार के साथ घर पर आया। राजकुमार के देख सिंड्रेला के परिवार वाले खुश हुए.

राजकुमार बोला : मै उस लड़की से शादी करना चाहता हूँ ! जिसका कांच का जूता हमारे महल मे गिर गया था, जो कि उस लड़की का था जो उस रात मेरे साथ नाच रही थी। हम इस चप्पल के मालिक की तलाश कर रहे हैं। मै उस लड़की से शादी करुगा जो भी इस जूते का मालिक है।

सिंड्रेला की सौतेली बहन बोली यह चप्पल मेरी है! लेकिन जुता उसकेे पैर के लिए बहुत बड़ा था! और दूसरी सौतेली बहन के पैर के लिए बहुत छोटा था! फिर राजकुमार ने सिंड्रेला को कोने में खड़े देखा। और हालांकि वह जिस तरह से उस रात मे दिखती थी उससे बहुत अलग दिख रही थी, राजकुमार ठीक उसके पास चला गया.

और बोला कृपया, क्या आप इस चप्पल को पहनने की कोशिश करेंगी? और वह चप्पल सिंड्रेला के पैरो मे आसानी से आ गई. फिर राजकुमार खुश हो कर बोला तुम वही हो जिसने कल रात मेरे साथ नृत्य किया था! तुम मेरी राजकुमारी हो! और फिर सिंड्रेला और राजकुमार की शानदार शादी हुई।

उन्होंने सभी को समारोह में आमंत्रित किया और किसी को भी नहीं छोड़ा। सिंड्रेला ने अपनी सौतेली बहनों और सौतेली माँ को भी आमंत्रित किया जिन्होंने सिंड्रेला की तरह दयालु और प्यार करने का फैसला किया। सिंड्रेला और प्रिंस तब खुशी-खुशी रहने लगे थे.


Ants (चींटी और टिड्डा)

Ant moral stories

 बोहोत साल पहेले एक घास के मैदान में एक चींटी और एक टिड्डा रहता था दिन भर चीटिया बोहोत काम करती थी दूर खेत से गेहूँ के दाने लाने का कठिन कार्य वोह करती थी उंनका यह कार्य बड़े ही अनुशासन से चलता था.

हर सुबह वोह जल्दी में रहती थी सुबह की पहेले किरणों के साथ वोह अपने सर पर बड़े ही भारी गेहूँ के  दाने ले कर संतुलन सँभालते घर जाती थी गेहूँ का हर एक दाना ध्यान से कप में रखती और दाने लाने के लिए फिर से वापस जाती पूरा दिन बिना थके बिना आराम किये जाती तथा आती और गेहूँ के दाने ध्यान से कप में रखती थी.

उधर दूसरी तरफ एक आलसी टिड्डा दिन भर छओ आराम करता और गाने गाता था भविष्य में क्या होगा इस्सकी फ़िक्र किये बिना वोहा आराम से जीता था उससे दिन भर काम करने वाली बेचारी चीटियों पर दया आती थी दिन बीत रहे थे तभी टिड्डे आलस भरा घास पर कूदता और आराम से स्वादिष्ट खाना खाता था गाना गाते गाते आराम से जी रहा था.

जब चीटिया दाने ले कर घर में अच्छे से सम्भाल कर रख रही थी और मेहनत कर रही थी एक दिन हर रोज़ की तरह सारे चीटिया दाने ले रही थी तब उन् में से एक चींटी भारी दानो की वजह से नीचे गिरी इसलिए वोह भूरा मनन कर रोने लगी उससे मदद करने के बजाय टिड्डा उससे देख कर हस्सन लगा चींटी ने कहा टिड्डे महाशय

यह दाना मेरे घर तक उठा कर ले जाने में आप मेरी मदद करेंगे में आपकी बोहोत आभारी रहूंगी चींटी के बातों को अनसुना कर के टिड्डा अपने ही संगीत में ढून्ढ रहा गया चींटी ने अकेले ही अपनी मेहनत से वोह दाना उठाया और वोह चली गयी टिड्डे ने पूछा तुम इनती मेहनत क्यों करती हो

प्यारी चींटी टिड्डे ने पूछा थोड़ा आराम कर लो थोड़ा मेरा गाना भी सुनलो गर्मी है दिन भी बड़ा है किस लिए भोज उठाने में वक़्त गावा रही हो चींटी ने अनसुना करके अपनी गर्दन घुमा ली थोड़ा सा जल्दी में ही खेत की तरह वोह रवाणा हो गयी तभी टिड्डा ज़ोर से हस्सा तुम बड़ी बेवक़ूफ़ चींटी हो

टिड्डे ने फिर से उससे पुकारा आओ आओ और मेरे साथ नाचो गाओ काम को भूल कर गर्मी का थोड़ा सा मज़ा लेते है में बारिश के मौसम के लिए खाना इकठा करने में लगी हूं चींटी ने कहा और तुम्हे भी ऐसा ही करना चाइये बारिश की चिंता इतनी क्यों करनी है

टिड्डे ने जवाब दिया अभी तोह हमारे पास बोहोत सारा खाना है और बोहोत सारा वक़्त है बरसात की तैयारी के लिए लेकिन चींटी को समाज आ गया था की वोह क्या कर रहा है इसलिए वोह अपने रासते निकल गयी


इधर टिड्डा पूरी गर्मी में अपने ही नाच गाने में व्यस्त रह गया सारे दिन काम कर के बारिश की तैयारी करने के बजाय उस्सने खेलना नाचना गाना इनने में महत्त्व यह सुन्दर गर्मी के दिन हमेशा रहने वाले नहीं है और जल्द ही बारिश और उसस्के बाद सर्दी आने वाली है

यह तोह वोह भूल ही गया था जल्द ही गर्मी का मौसम बारिश में बदल गया और बारिश के बाद सर्दी का मौसम आया सूरज अब बोहोत ही काम दीखता था दिन छोटा था डूण्डला और रात तथा बोहोत बड़ी और अँधेरी थी हर तरफ भयानक सर्दी और बर्फ गिरनी शुरू हो गयी थी

टिड्डा सर्दी से खपने लगा खुद को सूखे पत्तो से बचने की कोशिश में थकने लगा परन्तु हवा ज़ोर से आने पर उससे ठण्ड लगती थी उसे बोहोत भूक लगती थी और खाने के लिए कुछ मिलता नहीं था उसे पता चला की अगर कुछ नहीं मिला तोह वोह जल्द ही मर जायेगा वोह कमज़ोर हो गया था जल्द ही उसे समाज आ गया की चीटिया सही थी

उसे भी तैयारी करनी चाइये थी टिड्डे को अब नाचना गाना पसंद ही नहीं आ रहा था सर्दी से वहां भूखा था उसे बर्फ से बचने के लिए न घर था न खाने के लिए खाना था सारी हरियाली और खेत बर्फ से लिपटी थी और खाने के लिए कुछ भी नहीं था

उसने बोला अब में कहा जाओ में क्या करू टिड्डे को पछतावा हुआ इस भार की सर्दी हर भार से भूरी होगी यह टिड्डे ने सोचा ही नहीं था खुद के खाने का इंतज़ाम उ्सने नहीं किया था और वो दूसरों की मदद भी नहीं करता था केवल इसी वजह से वोह अगली गर्मी का मौसम देखने के लिए जीवत ही नहीं रहने वाला था

तभी उस्सने देखा की चीटिया गर्मी में इकठा किया हुआ खाना खाने का आनंद ले रही है फिर टिड्डे ने सोचा में चींटी के पास जाता हूं वहां मुझे खाना मिलेगा और आसरा भी टिड्डे को अपने आप पर शर्म आयी वोह थक कर चींटी के घर तक गया और उसने दरवाज़े आवाज़ लगायी नमस्ते चीटियों वोह मुस्कुराते हुए बोला में आ गया

तुम लोगो के लिए गाना गाने लेकिन उसके लिए मुझे थोड़ी सी गर्मी चाइये और कुछ खाना भी चाइये ताकि में गा सकू फिर चिटिया बोली नहीं नहीं टिड्डे महाशय हमे आपका गाना सुनने के कोई जरूरत नहीं है टिड्डे ने घर के अन्दर जाने के लिए गिड़गिड़ा कर बीनती की और ज़िंदा रहने के लिए खाने की बीक मांगी फिर चींटी ने आश्चर्य से कहा सर्दी के लिए

आपने कोई इंतज़ाम नहीं किया तोह गर्मियों में आखिर आप कर क्या रहे थे टिड्डे ने बोला वोह वोह वोह मुझे खाना जमा करने के लिए समय ही नहीं मिला टिड्डे ने अपना कारण बताया में संगीत में इतना busy था की मेंं समाज ही नहीं पाया की गर्मी का समय कब निकल गया चीटियों ने उसकी तरफ घ्रणा से देखा और उस्सकी तरफ पीठ दिखा कर

अपने अपने काम पर चली गयी एक चींटी जिस पर टिड्डा हस्सा था उसके तरफ मुडकर बोलि पुरे गर्मी के मौसम में काम करती रही और तुम गाना बजाते और मेरा मज़ाक उड़ाते रहे अब तुम्हारे लिए मेरे पास न खाना है और न आसरा है सर्दी के मौसम के लिए तुम्हे अपने बारे में सोचना चाइये था चीटियों ने टिड्डे के मुँह पर दरवाज़ा बंद किया और टिड्डा रोने लगा   


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